डैवी के बड़े भाई डैन ने खरगोश के
परिवार को
ईस्टर बनी के बारे में बताया कि वो इन्सानी बच्चों के लिए तोहफे और रंगीन अंडे लाता है। खरगोश के बच्चों ने तुरंत ये तय किया कि वे भी उसकी तलाश करेंगे और उससे कहेंगे कि कि उनको भी वो तोहफे दे।
बच्चे ढूंढ़ते रहे लेकिन उन्हें ईस्टर बनी नहीं मिला। मायूस होकर
डैवी के भाई-बहन तो वापस घर की ओर चल दिए लेकिन डैवी कुछ और सोच रहा था। उसके दिमाग में एक विचार आया. क्या अपने परिवार के साथ हैप्पी ईस्टर मनाने की डैवी की
योजना सफल हुई? या वो कुछ भूल गया था?
जब डैवी की बहुत सोच विचार कर बनाई गई योजना असफल हो जाती है तो बच्चों को डैवी से सहानुभूति होने लगती है। इसी तरह जब डैवी के परिवार वाले खुश होते हैं तो बच्चे भी खुश हो जाते हैं।
कहानी के पात्रों के साथ बच्चे बिलकुल घुलमिल जाते हैं। लोकप्रिय डैवी श्रंखला की ये आठवीं कहानी है।
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