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हास्य-व्यंग्यःलल्लू लगावें, सल्लू गिरावें

(1 समीक्षा)
लेखक :K. P. Sakxena  Summary by:ambalika
बेचारे जरदारी रो पडे, कहने लगे-'हाय अब्बा। मेरा कसूर तो कोई बताएं? माल क्यों छिन लिया गया? अब बच्चों का(आतंकवादिओंका)क्या होगा? उनका खर्चा कैसे चलेगा Read Summary
प्रकाशन तिथि: फरवरी 11, 2009 विजिट्स: 41 शब्द : 600
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